🤗 अपनों' की ही अनदेखी! भाजपा को घेरने निकले थे कांग्रेसी, खुद ही अपनी कलह में उलझे; युवक कांग्रेस के दफ्तर में मचा घमासान..
ब्यावरा: 'अपनों' की उपेक्षा से भड़की बगावत, कांग्रेस की प्रेसवार्ता में हाईवोल्टेज ड्रामा!
ब्यावरा (आकाश शर्मा)। मिली जानकारी के अनुसार - भारतीय जनता पार्टी की खामियां गिनाने के लिए मंच सजाया गया था, रणनीति भाजपा को घेरने की थी, लेकिन ब्यावरा के सिटी पार्क में मंगलवार को जो हुआ उसने कांग्रेस की 'अंदरूनी कलह' को सरेआम उजागर कर दिया। अपनी ही पार्टी की प्रेसवार्ता में नहीं बुलाए जाने से नाराज युवक कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष और सचिव ने न केवल जमकर हंगामा किया, बल्कि संगठन की कार्यशैली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए।
संयोग से पता चला, फिर मंच के सामने ही छिड़ गया संग्राम
हैरानी की बात यह है कि जिला उपाध्यक्ष शिव दांगी और जिला सचिव अर्पित शर्मा को इस महत्वपूर्ण प्रेसवार्ता की सूचना तक नहीं दी गई थी। दोनों पदाधिकारी संयोगवश अस्पताल रोड से गुजर रहे थे, तभी सिटी पार्क के बाहर कांग्रेस नेताओं की गाड़ियों का जमावड़ा देखकर उन्हें शक हुआ। जैसे ही वे अंदर पहुँचे, वहां प्रेसवार्ता चल रही थी। यह देखते ही दोनों का पारा चढ़ गया और उन्होंने मंच के सामने ही अपना विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिया।
"हमने चुनाव में पैसा लगाया, मेहनत की और हमें ही दरकिनार किया जा रहा है"
नाराज पदाधिकारियों ने तीखे लहजे में कहा कि वे युवक कांग्रेस के चुनाव में पैसा खर्च कर और कड़ी मेहनत कर जीतकर आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया:
* युवक कांग्रेस अब बड़े नेताओं के इशारों की 'कठपुतली' बन गई है।
* संगठन के कार्यक्रमों से जानबूझकर निर्वाचित पदाधिकारियों को दूर रखा जा रहा है।
* बड़े नेताओं के साथ मिलकर संगठन को 'बर्बाद' करने की साजिश रची जा रही है।
> "जब जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को ही अंधेरे में रखा जाएगा, तो आम कार्यकर्ता कैसे सक्रिय रहेगा?" — शिव दांगी, जिला उपाध्यक्ष (युका)
दिग्विजय बनाम भाजपा: रणनीति से पहले ही बिखराव
दरअसल, यह प्रेसवार्ता 1 से 10 अप्रैल तक चलने वाले विशेष अभियान की रूपरेखा बताने के लिए बुलाई गई थी। इसके तहत:
* 1993 से 2003: पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के कार्यकाल की उपलब्धियां जनता तक पहुँचाना।
* 2003 से 2026: भाजपा सरकार की विफलताओं और नाकामियों को बेनकाब करना।
लेकिन विडंबना देखिए, जिस गुटबाजी को खत्म कर भाजपा को चुनौती देने की तैयारी थी, उसी गुटबाजी ने कांग्रेस की फजीहत करा दी।
वरिष्ठ नेताओं ने संभाला मोर्चा, डैमेज कंट्रोल की कोशिश
हंगामे की स्थिति को देखते हुए वहां मौजूद पूर्व विधायक रामचंद्र दांगी और जिला पंचायत अध्यक्ष चंदर सिंह सौंधिया ने मोर्चा संभाला। दोनों ने नाराज पदाधिकारियों को समझाइश दी और काफी मशक्कत के बाद मामला शांत कराया। बाद में दोनों नाराज नेताओं को मंच से अपनी बात रखने का मौका भी दिया गया।
अध्यक्ष की सफाई: "यह तो हमारा परिवार है"
इस पूरे मामले पर जिला युवक कांग्रेस अध्यक्ष अमन अरोरा ने डैमेज कंट्रोल करते हुए कहा कि पार्टी में कोई गुटबाजी नहीं है। उन्होंने कहा, "वे हमारे परिवार के सदस्य हैं, किसी को जानबूझकर नजरअंदाज नहीं किया गया। जो भी गलतफहमी है, उसे मिल बैठकर दूर कर लिया जाएगा।"
बड़ी बात: भाजपा पर हमला बोलने की तैयारी कर रही कांग्रेस के लिए यह घटना एक बड़ा 'सेटबैक' है। जब संगठन के भीतर ही समन्वय की इतनी बड़ी कमी हो, तो जनता के बीच एकजुटता का संदेश देना पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगा।



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