👉"प्रकृति से छेड़छाड़ रुकी नहीं तो आ जाएगी सुनामी, अब 'मिट्टी के पुतलों' को होना होगा सजग"..
👉माचलपुर में गूंजा सीमा दीदी का आह्वान; पर्यावरण दिवस पर क्षेत्रवासियों ने लिया पांच महा-संकल्प..
👉माचलपुर ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान में मना विश्व पर्यावरण दिवस; पर्यावरण संरक्षण और आध्यात्मिक जागृति का दिया संदेश..
माचलपुर संवाददाता आकाश शर्मा। "इंसान जैसे-जैसे आधुनिकता की अंधी दौड़ में फंसता जा रहा है, वह प्रकृति से दूर होता जा रहा है। हमारा शरीर प्रकृति के पांच तत्वों से बना है, लेकिन बिना आत्मा के यह सिर्फ मिट्टी का पुतला है। आज समय आ गया है कि हम केवल एक दिन पर्यावरण दिवस न मनाएं, बल्कि हर दिन प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति सकारात्मक भाव रखें।"👉मुख्य अतिथि और गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति..
माचलपुर में आयोजित इस गरिमामयी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्री राम मानस समिति पिपलिया कुलमी के अध्यक्ष भ्राता गोवर्धन जी पाटीदार एवं भ्राता गंगाराम जी पाटीदार विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस अवसर पर संस्थान में प्रतिदिन आध्यात्मिक ज्ञान का लाभ लेने वाली क्षेत्र की माताएं, बहनें और प्रबुद्ध जन बड़ी संख्या में मौजूद थे।
ग्लोबल वार्मिंग और प्रकृति के असंतुलन पर चिंता।
सीमा दीदी ने अपने संबोधन में पर्यावरण दिवस के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसकी शुरुआत वर्ष 1972 में केन्या के नैरोबी शहर से हुई थी। उन्होंने वर्तमान परिस्थितियों पर चिंता जताते हुए कहा:
"वृक्षों की अंधाधुंध कटाई और बढ़ते प्रदूषण के कारण आज प्रकृति असंतुलित हो चुकी है। भीषण गर्मी, कड़ाके की ठंड और बिन मौसम बरसात इसी छेड़छाड़ का नतीजा हैं। बिना ऑक्सीजन के जीवन असंभव है, इसलिए अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना हम सभी का परम उत्तरदायित्व है।"
👉 संसार को चलाने वाली तीन शक्तियां: प्रकृति, पुरुष और परमात्मा
दीदी ने आध्यात्मिक रहस्य को समझाते हुए कहा कि इस सृष्टि चक्र को सुचारू रूप से चलाने के लिए तीन चीजें अनिवार्य हैं:
प्रकृति (पांच तत्व)
पुरुष (आत्मा)
परमात्मा (प्रकृतिपति)
उन्होंने स्पष्ट किया कि जब हम प्रकृति की निःस्वार्थ सेवा करते हैं, तो प्रकृतिपति परमात्मा प्रसन्न होते हैं। अंतिम समय में यही प्रकृति आत्मा की मददगार बनती है और मनुष्य 'प्रकृतिजीत' बनता है। इसके विपरीत, यदि हम प्रकृति का शोषण करेंगे, तो यही प्रकृति भूकंप, बाढ़ और सुनामी के रूप में विनाश का कारण भी बन सकती है।
माचलपुर में गूंजा सामूहिक संकल्प: "सुखमय संसार" बनाने का आह्वान।
कार्यक्रम के समापन सत्र में संस्था से जुड़े सभी सदस्यों और उपस्थित माचलपुर वासियों ने पर्यावरण को बचाने के लिए गंभीर प्रयास करने का संकल्प लिया।
पर्यावरण सुधार के लिए 5 मुख्य संकल्प:
🌳 अत्यधिक वृक्षारोपण: केवल पौधे लगाना ही नहीं, बल्कि उनके बड़े होने तक पूर्ण देखभाल करना।
🚫 प्लास्टिक मुक्त जीवन: प्लास्टिक और पॉलिथीन का उपयोग पूरी तरह बंद करना।
🧠 सकारात्मक विचार: प्रतिदिन वृक्षों और जीव-जंतुओं के प्रति शुभ भावना रखना।
🧘 शुद्ध वाइब्रेशन: परमात्मा से शक्ति लेकर प्रकृति और पूरे विश्व को पवित्र प्रकंपन (वाइब्रेशंस) देना।
🙏 सदा सर्वदा भलाई: हर मनुष्य और जीव मात्र के प्रति केवल कल्याण की भावना रखना।
👉कार्यक्रम के अंत में सभी ने एक सुर में कहा कि जब हम आंतरिक और बाहरी दोनों पर्यावरण को शुद्ध करेंगे, तभी सही अर्थों में पर्यावरण दिवस मनाना सार्थक सिद्ध होगा और हमारा संसार पुनः सुखमय बन जाएगा।




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