✍️ माचलपुर नगर मै दूध की कीमत पर उबाल ! दुग्ध उत्पादकों ने बजाई आंदोलन की घंटी, 12 सितंबर तक का अल्टीमेटम।
✍️12 रुपए प्रति फैट और 80 से 90 रुपए लीटर दूध के दाम की मांग, मांगें नहीं मानीं तो 13 सितंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी।
✍️देवनारायण मंदिर में ली सामूहिक शपथ—दाम बढ़ने तक एकजुट रहेगा संघ
आंदोलन को लेकर दुग्ध उत्पादकों में एकजुटता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देवनारायण जी के मंदिर में दुग्ध उत्पादकों एवं दूध विक्रेताओं ने सामूहिक रूप से शपथ ली। इस दौरान सभी ने एकजुट होकर संकल्प लिया कि जब तक दूध के दाम उनकी मांग के अनुरूप नहीं बढ़ाए जाते, तब तक वे एकता के साथ आंदोलन में डटे रहेंगे और किसी भी परिस्थिति में पीछे नहीं हटेंगे। मंदिर परिसर में ली गई इस सामूहिक शपथ ने आंदोलन को एक नया तेवर दे दिया है। उत्पादकों का कहना है कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि क्षेत्र के उन सभी पशुपालकों की है, जो दिन-रात मेहनत कर दूध का उत्पादन करते हैं। संघ ने स्पष्ट किया कि मांग पूरी होने तक सभी दुग्ध उत्पादक एकजुट होकर आंदोलन में सहयोग करेंगे।
✍️12 रुपए प्रति फैट और 80 से 90 रुपए लीटर की मांग।
12 सितंबर तक का अल्टीमेटम, 13 से दूध सप्लाई बंद करने की चेतावनी।
दुग्ध उत्पादक संघ ने प्रशासन को 12 सितंबर 2026 तक का अल्टीमेटम दिया है। संघ के अनुसार यदि निर्धारित समय तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 12 सितंबर के बाद दूध की सप्लाई बंद करने का निर्णय लिया जाएगा। वहीं 13 सितंबर 2026 से समस्त दुग्ध उत्पादकों द्वारा अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी गई है। यदि ऐसा हुआ तो जीरापुर क्षेत्र सहित आसपास के इलाकों में दूध की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और आम उपभोक्ताओं को भी दूध की किल्लत का सामना करना पड़ सकता है। दुग्ध उत्पादकों ने प्रशासन से अपील की है कि हड़ताल की नौबत आने से पहले ही उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार कर उचित समाधान निकाला जाए।
✍️अब गेंद प्रशासन के पाले में।
दुग्ध उत्पादकों के अल्टीमेटम और सामूहिक शपथ के बाद अब प्रशासन के फैसले पर सबकी निगाहें टिक गई हैं। एक ओर पशुपालक बढ़ती लागत के अनुसार दूध का उचित मूल्य चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर दूध के भाव में बढ़ोतरी का सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ सकता है। ऐसे में प्रशासन के सामने दुग्ध उत्पादकों को राहत देने और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है। फिलहाल दुग्ध उत्पादकों की एकजुटता और 13 सितंबर से प्रस्तावित हड़ताल की चेतावनी ने पूरे क्षेत्र में हलचल बढ़ा दी है। ज्ञापन सौंपने एवं आंदोलन में दुग्ध विक्रेता संघ के प्रमुख नेता फूलसिंह गुर्जर, यशवंत सिंह गुर्जर लिम्बोदा, युवा नेता नरेंद्रसिंह भड़ाना, भेरुलाल गुर्जर, सूजान गुर्जर, सुरेंद्र गुर्जर, श्री देवनारायण अखाड़ा अध्यक्ष शिव गुर्जर (देवा), लक्ष्मण सिंह गुर्जर, इन्द्र सिंह गुर्जर,जगदीश गुर्जर, भगवान, कमल सिंह, रामबाबू, विष्णु, गोविंद, महेंद्र गुर्जर, कालू सिंह गुर्जर बंदा, बने सिंह और राजेश, हेमराज गुर्जर सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण, दुग्ध उत्पादक एवं दूध विक्रेता मौजूद रहे।





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