🚩जय श्री राम और जय बजरंगबली के जयघोष से गूंजेगा मार्ग, चाठा कुंडी बालाजी मंदिर से 9 सितंबर को शुरू होगी पैदल यात्रा।
माचलपुर (आकाश शर्मा संपादक)। जब मंजिल बाबा का दरबार हो और दिल में भक्ति की उमंग, तो कदम अपने आप चल पड़ते हैं। इसी अटूट आस्था और विश्वास के साथ माचलपुर से श्री कामखेड़ा सरकार के पावन दरबार तक भव्य पैदल यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। “एक कदम भक्ति की ओर, एक कदम बाबा के द्वार” के संकल्प के साथ निकलने वाली यह यात्रा धार्मिक आस्था का अनूठा संगम बनने जा रही है।09 सितंबर 2026, बुधवार को सुबह 7 बजे श्री चाठा कुंडी बालाजी मंदिर, माचलपुर से यात्रा का शुभारंभ होगा। यात्रा शुरू होते ही जय श्री राम, जय श्री हनुमान और जय कामखेड़ा सरकार के जयघोष से वातावरण भक्तिमय होने की उम्मीद है। भक्त पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ बाबा के दरबार की ओर कदम बढ़ाएंगे।
🚩 एक शहर से नहीं, गांव-गांव से जुड़ेगा आस्था का कारवां
यह यात्रा माचलपुर से शुरू होकर कचनारिया, ब्राह्मणगांव, रामगढ़, सरहदी, घाटोली, अकलेरा होते हुए कामखेड़ा पहुंचेगी। रास्ते में श्रद्धालुओं के जुड़ने से भक्ति का यह कारवां लगातार बढ़ने की उम्मीद है। यात्रा के दौरान जगह-जगह भक्तिमय माहौल और बाबा के जयकारों से वातावरण गूंजने की संभावना है।
🔥 भक्तों का हौसला बढ़ाने साथ रह सकते हैं पंडित रोहित नागर।
🙏 बाबा के दरबार में लगेगी हाजिरी।
आयोजकों का कहना है कि यह सिर्फ एक पैदल यात्रा नहीं, बल्कि भक्ति, विश्वास और समर्पण की यात्रा है। भक्त बाबा के दरबार तक पहुंचकर अपनी हाजिरी लगाएंगे और सुख-समृद्धि एवं परिवार की खुशहाली की कामना करेंगे।
आयोजकों ने सभी हनुमान भक्तों से आह्वान किया है कि वे अपने परिवार एवं परिचितों के साथ अधिक से अधिक संख्या में यात्रा में शामिल हों और इस भक्तिमय यात्रा को यादगार बनाएं।
🚩 न शुल्क, न कोई औपचारिकता—सिर्फ बाबा की भक्ति
पैदल यात्रा में शामिल होने वाले किसी भी हनुमान भक्त पर किसी प्रकार का शुल्क नहीं रखा गया है। यात्रा पूर्णतः निःशुल्क है।
यात्रा प्रारंभ: श्री चाठा कुंडी बालाजी मंदिर, माचलपुर
दिनांक: 09 सितंबर 2026, बुधवार
समय: प्रातः 7:00 बजे
मार्ग: माचलपुर → कचनारिया → ब्राह्मणगांव → रामगढ़ → सरहदी → घाटोली → अकलेरा → कामखेड़ा
समापन: श्री कामखेड़ा सरकार का पावन दरबार
अधिक जानकारी:
शिवम् पंडित — 7566614012
7415942025 | 7415704465
🚩 “इरादे रोज बनते हैं और बनकर टूट जाते हैं, वही पैदल जाते हैं जिन्हें मेरे बाबा बुलाते हैं!”



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