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✍️भोले की भक्ति में डूबा नगर, शिवालयों में उमड़ा जनसैलाब; करीब चार क्विंटल खिचड़ी का लगा भोग।

✍️भोले की भक्ति में डूबा नगर, शिवालयों में उमड़ा जनसैलाब; करीब चार क्विंटल खिचड़ी का लगा भोग।

👉सावन के अंतिम सोमवार पर माचलपुर में उमड़ा आस्था का सैलाब, शिवालयों में गूंजे हर-हर महादेव के जयकारे।



माचलपुर (आकाश शर्मा संपादक)। सावन के पावन महीने के अंतिम सोमवार को माचलपुर नगरी पूरी तरह भगवान भोलेनाथ की भक्ति में डूबी नजर आई। सुबह की पहली किरण के साथ ही नगर के प्रमुख शिवालयों में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। मंदिरों के बाहर भक्तों की लंबी कतारें दिखाई दीं तो अंदर हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष से वातावरण शिवमय हो उठा। हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर बेलपत्र, दूध एवं पुष्प अर्पित किए और परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली एवं मंगलमय जीवन की कामना की। सावन के अंतिम सोमवार को लेकर नगर में सुबह से ही विशेष धार्मिक उत्साह देखने को मिला। प्रमुख शिव मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, आकर्षक श्रृंगार और धार्मिक आयोजन हुए। श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ के चलते पूरे दिन नगर की गलियों से लेकर शिवालयों तक भक्ति की अलग ही छटा नजर आई।

प्राचीन मान्यताओं और आस्था की धरती है माचलपुर।

माचलपुर की धार्मिक पहचान प्राचीन मान्यताओं से जुड़ी हुई है। मान्यता है कि प्राचीन काल में माचलपुर को हिमाचल नगरी के नाम से जाना जाता था। धार्मिक परंपराओं के अनुसार नगर की बाघा बल्डी में भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। यहां आज भी सात फेरों के प्रतीक स्वरूप निशान होने की मान्यता है। इसी आस्था के चलते नवविवाहित दंपती यहां पहुंचकर इन पवित्र निशानों की परिक्रमा करते हैं और सुखी, समृद्ध एवं सफल दांपत्य जीवन की कामना करते हैं। सावन के अंतिम सोमवार पर बाघा बल्डी में भी श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ देखने को मिली।


शिवालयों में मनमोहक श्रृंगार बना आकर्षण।

सावन के अंतिम सोमवार के अवसर पर नगर के प्रमुख शिव मंदिरों को विशेष रूप से सजाया गया। मनकामनेश्वर महादेव मंदिर में भगवान भोलेनाथ का बाबा बर्फानी स्वरूप में किया गया मनमोहक श्रृंगार श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। बर्फानी स्वरूप में सजे भोलेनाथ के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्त मंदिर पहुंचे। वहीं स्वयंभू गुप्तेश्वर महादेव मंदिर में फूलों से की गई विशेष सजावट ने मंदिर की सुंदरता में चार चांद लगा दिए। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर बेलपत्र, दूध एवं पुष्प अर्पित किए। इसके अलावा बाबा बिल्लेश्वर महादेव मंदिर में भी दिनभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। सुबह से देर शाम तक मंदिर परिसर हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजता रहा।

बाघा बल्डी पर करीब चार क्विंटल खिचड़ी का प्रसाद।

सावन के अंतिम सोमवार के अवसर पर बाघा बल्डी में श्रद्धालुओं के लिए विशाल प्रसाद वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। करीब चार क्विंटल खिचड़ी का प्रसाद तैयार करवाकर श्रद्धालुओं में वितरित किया गया। प्रसाद ग्रहण करने के लिए बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे। धार्मिक आयोजन, मंदिरों का विशेष श्रृंगार, शिव आराधना और विशाल प्रसाद वितरण ने माचलपुर को दिनभर भक्तिमय बनाए रखा। नगर का माहौल ऐसा था मानो हर गली से भगवान शिव के जयकारे निकल रहे हों।

आस्था, परंपरा और भक्ति का अद्भुत संगम।

सावन के अंतिम सोमवार पर माचलपुर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने एक बार फिर नगर की गहरी धार्मिक आस्था और प्राचीन परंपराओं की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत की। शिवालयों में उमड़ा जनसैलाब, गूंजते जयकारे, मनमोहक श्रृंगार और प्रसाद वितरण के बीच पूरा नगर “हर-हर महादेव” के जयघोष से गुंजायमान रहा। श्रद्धालुओं के लिए यह दिन केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आस्था, विश्वास और धार्मिक परंपराओं से जुड़ने का एक ऐसा अवसर बना, जिसने माचलपुर को पूरी तरह शिवमय कर दिया।

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