✍️नशे से दूरी है ज़रूरी माचलपुर से उठी नशामुक्ति की बुलंद आवाज।
माचलपुर (आकाश शर्मा) देवनारायण अखाड़ा माचलपुर के अध्यक्ष शिव गुर्जर ‘देवा भाई’ के अभियान को मिला देशव्यापी संदेश का साथ — केरल की सुश्री शायनी द रायडर 32 हजार किलोमीटर का नशामुक्ति संदेश लेकर पहुंचीं भोपाल।
माचलपुर। नशे के खिलाफ जंग अब केवल किसी एक व्यक्ति, संस्था या शहर की मुहिम नहीं, बल्कि स्वस्थ और सुरक्षित समाज के निर्माण का संकल्प बनती जा रही है। इसी दिशा में देवनारायण अखाड़ा माचलपुर के अध्यक्ष शिव गुर्जर ‘देवा भाई’ द्वारा नगर माचलपुर में चलाया जा रहा नशा मुक्ति अभियान लगातार लोगों को जागरूक कर रहा है। अभियान के तहत नगर के युवाओं के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को भी नशे से दूर रहने और अपने भविष्य को बेहतर बनाने की समझाइश दी जा रही है।इसी कड़ी में नशामुक्ति का संदेश लेकर देशभर में जागरूकता अभियान चला रहीं केरल की सुश्री शायनी द रायडर का सफर भी प्रेरणादायी बन गया है। वे बाइक से देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचकर युवाओं और आम नागरिकों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक कर रही हैं। उनका यह सफर केवल दूरी तय करने का नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता की नई सोच पैदा करने का अभियान है।
32 हजार किलोमीटर का सफर, 322 दिनों की मेहनत।
सुश्री शायनी द रायडर ने करीब 32,000 किलोमीटर का नशामुक्ति जागरूकता सफर तय किया है। 322 दिनों के अथक प्रयास के दौरान उन्होंने लोगों के बीच पहुंचकर एक बेहद जरूरी संदेश दिया—नशा जिंदगी की परेशानियों का समाधान नहीं, बल्कि जिंदगी और सपनों के रास्ते में बड़ी बाधा बन सकता है।।बाइक पर हजारों किलोमीटर का सफर तय कर भोपाल पहुंचीं शायनी का उद्देश्य साफ है—देश के युवाओं को नशे से दूर रखना और उन्हें शिक्षा, खेल, हुनर, रोजगार तथा अपने सपनों की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करना।
उनका संदेश है—
“सपनों को चुनिए, नशे को नहीं।”
युवाओं को सबसे ज्यादा जागरूक होने की जरूरत।
नशे की शुरुआत अक्सर जिज्ञासा, दोस्तों के दबाव या गलत संगत से होती है और धीरे-धीरे यह आदत व्यक्ति के स्वास्थ्य, पढ़ाई, काम, परिवार और सामाजिक जीवन को प्रभावित कर सकती है। शराब, तंबाकू, गुटखा, बीड़ी-सिगरेट और अन्य नशीले पदार्थों से दूरी बनाना केवल व्यक्तिगत फैसला नहीं, बल्कि परिवार और समाज के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। नशे की लत से आर्थिक नुकसान बढ़ सकता है, परिवार में तनाव पैदा हो सकता है और व्यक्ति की शिक्षा एवं रोजगार की संभावनाएं प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए युवाओं को शुरुआत से ही जागरूक करना बेहद जरूरी है।
माचलपुर से ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच रहा संदेश।
शिव गुर्जर ‘देवा भाई’ के नेतृत्व में चल रहे अभियान की खास बात यह है कि इसका संदेश केवल नगर तक सीमित नहीं रखा जा रहा। माचलपुर के साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को भी नशे से दूर रहने की समझाइश दी जा रही है। युवाओं को प्रेरित किया जा रहा है कि वे अपना समय खेल, शिक्षा, सामाजिक गतिविधियों, रोजगार और सकारात्मक कार्यों में लगाएं। क्योंकि जिस युवा के हाथ में हुनर और मेहनत होती है, उसके भविष्य की दिशा मजबूत होती है।
नशे के खिलाफ सामूहिक संकल्प जरूरी।
नशामुक्त समाज केवल भाषणों से नहीं बनेगा। इसके लिए परिवार, युवा, सामाजिक संगठन, जनप्रतिनिधि, प्रशासन और आम नागरिक—सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। बच्चों और युवाओं से खुलकर संवाद, गलत संगत से बचाव और नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूकता इस अभियान को मजबूत बना सकती है। शायनी द रायडर का देशव्यापी सफर और माचलपुर में शिव गुर्जर ‘देवा भाई’ का स्थानीय अभियान एक ही संदेश को मजबूत करता है—नशे को ना और जिंदगी को हां।
आइए, लें नशामुक्त भारत का संकल्प।
‘नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0’ अभियान के साथ आइए और नशामुक्त समाज के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं।
नशा छोड़ें — जीवन जोड़ें।
युवाओं को नशे से बचाएं — उनके सपनों को उड़ान दें।
आओ मिलकर बनाएं — नशामुक्त भारत, स्वस्थ भारत।




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