👉 रची गई मोहब्बत की नई इबारत: मजहब की दीवारें तोड़ मुस्लिम जेल अफसर ने कैदी से किया ब्याह, बजरंग दल ने बरसाए फूल, किया कन्यादान..
लवकुशनगर, छतरपुर संवाददाता आकाश शर्मा। जहां नफरत की आग में रिश्ते जलते हैं, वहीं लवकुशनगर की धरती पर मोहब्बत ने इतिहास रच दिया! जेल की सलाखों के पीछे से शुरू हुई एक प्रेम कहानी ने पूरे देश को चौंका दिया है। वर्दी पहनकर कानून का राज चलाने वाली मुस्लिम महिला अफसर ने मजहब, समाज और अपने खून के रिश्तों को ठुकराकर हत्या के मामले में 14 साल की सजा काट चुके हिंदू युवक का हाथ थाम लिया। 5 मई की वो शाम गवाह बनी जब इंसानियत ने कट्टरता को घुटनों पर ला दिया।
👉 सलाखों के पीछे खिली इश्क की कली, वर्दी और कैदी की ड्रेस में पनपा प्यार..
कहानी शुरू होती है केंद्रीय जेल सतना की ऊंची चारदीवारी से। रीवा की रहने वाली फिरोजा खातून, जो सहायक जेल अधीक्षक की कुर्सी पर बैठकर हजारों कैदियों पर हुक्म चलाती थीं, उनका दिल चंदला के धर्मेंद्र सिंह (अभिलाष) के लिए धड़क उठा। धर्मेंद्र कोई आम कैदी नहीं था—2007 में नगर परिषद उपाध्यक्ष कृष्ण दत्त दीक्षित की बेरहमी से हत्या कर लाश जमीन में गाड़ देने के जुर्म में उसे उम्रकैद हुई थी। जेल में फिरोजा वारंट इंचार्ज थीं और धर्मेंद्र वारंट का काम करता था। रोज फाइलों के आदान-प्रदान में न जाने कब निगाहें मिलीं, बातें हुईं और दिल मिल गए। 14 साल की लंबी सजा काटकर जब धर्मेंद्र अच्छे आचरण की बदौलत 4 साल पहले जेल से बाहर आया, तो फिरोजा ने समाज की परवाह किए बिना ऐलान कर दिया—"मोहब्बत का कोई मजहब नहीं होता!"
👉 खून के रिश्तों ने मुंह मोड़ा, तो बजरंग दल ने दिया बेटी का फर्ज...
5 मई को लवकुशनगर का मैरिज हाउस दुल्हन की तरह सजा था। शहनाई की गूंज और वैदिक मंत्रों के बीच जब फिरोजा ने हिंदू रीति से सात फेरे लिए, तो नजारा देखने लायक था। सबसे बड़ा धमाका तब हुआ जब पता चला कि फिरोजा के अपने मां-बाप, भाई-बहन ने इस रिश्ते से मुंह मोड़ लिया। मंडप सूना था, बेटी की डोली उठाने वाला कोई नहीं था। तभी एंट्री हुई बजरंग दल की! भगवा गमछा डाले कार्यकर्ता आगे आए और ऐलान किया—"ये बेटी अब पूरे समाज की है।" ढोल-नगाड़ों के बीच बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने कन्यादान किया, फूल बरसाए और दूल्हा-दुल्हन को आशीर्वाद दिया। वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं। एक कार्यकर्ता ने माइक थामकर कहा, "जो काम नेता नहीं कर पाए, वो मोहब्बत ने कर दिखाया। आज हमने नफरत को हरा दिया!"
👉 जेल में मचा हड़कंप, कैदियों ने बजाई तालियां..
जैसे ही शादी की खबर केंद्रीय जेल सतना पहुंची, पूरे जेल परिसर में भूचाल आ गया। जो कैदी कभी फिरोजा मैडम से थर-थर कांपते थे, आज उन्हीं के लिए तालियां बजा रहे थे। एक पुराने कैदी ने कहा, "मैडम ने साबित कर दिया कि जेलर का दिल भी धड़कता है। उन्होंने हमें इंसान समझा, हमने उन्हें भगवान मान लिया।" जेल अधिकारियों तक ने दबी जुबान में माना, "फिरोजा ने ड्यूटी में जितनी सख्ती दिखाई, इश्क में उतनी ही नर्मदिली दिखाई है। यह सतना की गंगा-जमुनी तहजीब का सबसे बड़ा सबूत है।"
👉 14 साल की सजा, 4 साल का इंतजार और अब 7 जन्मों का साथ..
धर्मेंद्र(अभिलाष) की जिंदगी फिल्मी कहानी से कम नहीं। 2007 में चंदला के उपाध्यक्ष की हत्या, लाश को जमीन में दफनाना, फिर उम्रकैद। 14 साल तक जेल की रोटी तोड़ी, लेकिन हौसला नहीं तोड़ा। जेल में ही उसे मोहब्बत मिल गई। 4 साल पहले जब वह रिहा हुआ, तो दुनिया बदल चुकी थी, लेकिन फिरोजा का प्यार नहीं बदला। मंगलवार को हुई इस शादी ने पूरे बुंदेलखंड को हिला दिया है। सोशल मीडिया पर लोग लिख रहे हैं—"जहां राजनेता हिंदू-मुस्लिम करते हैं, वहां एक जेलर और कैदी ने मोहब्बत का राज कायम कर दिया।"
👉 सवाल जो हर जुबान पर है...
क्या अब भी समाज अंतरधार्मिक शादियों को शक की नजर से देखेगा? क्या एक हत्या का मुजरिम सुधर कर नई जिंदगी नहीं शुरू कर सकता? क्या वर्दी वाली मोहब्बत गुनाह है? फिलहाल लवकुशनगर ने इन सारे सवालों का जवाब दे दिया है—इंसानियत सबसे बड़ा मजहब है, और मोहब्बत सबसे बड़ी अदालत।
👉 एक नजर में पूरी दास्तान..
• दूल्हा: धर्मेंद्र सिंह, चंदला निवासी, हत्या का पूर्व दोषी, 14 साल की सजा काटकर 4 साल पहले रिहा
• दुल्हन: फिरोजा खातून, रीवा निवासी, केंद्रीय जेल सतना में सहायक जेल अधीक्षक
• तारीख: 5 मई 2026, लवकुशनगर मैरिज हाउस • खास बात: मुस्लिम परिवार गैरहाजिर, बजरंग दल ने किया कन्यादान, वैदिक रीति से विवाह
यह शादी नहीं, एक तमाचा है उन चेहरों पर जो धर्म के नाम पर इंसानों को बांटते हैं। लवकुशनगर ने बता दिया कि मोहब्बत की ताकत के आगे मजहब की हर दीवार गिर जाती है।







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